आईयूकेडब्ल्यूसी कार्यशालाएँ : हिमालय क्षेत्र में वर्षा पूर्वानुमानों एवं जलवायु की पूर्व-सूचनाओं को घाटी के स्तर पर जल विज्ञान संबंधी प्रतिमानन के साथ एकीकृत करना

workshop himalaya

भारतीय गतिविधि में अग्रणी नाम: 

डॉ श्रेस्थ तयाल

भारतीय गतिविधि में अग्रणी संस्थान: 

द एनर्जी एंड रिसौर्सेस इंस्टीट्यूट(टेरी)

यूके गतिविधि में अग्रणी नाम: 

डॉ मार्टिन विडमन

यूके गतिविधि में अग्रणी संस्थान: 

ब्रिमिंघम विश्वविद्यालय

भारत-यूके जल केंद्र द्वारा हिमालय क्षेत्र में वर्षा पूर्वानुमानों एवं जलवायु की पूर्व-सूचनाओं को घाटी के स्तर पर जल विज्ञान संबंधी प्रतिमानन के साथ एकीकृत करना नामक विषय पर 2-4 मई 2018 को भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून, भारत में तीन दिवसीय एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

जल विज्ञान संबंधी परिवर्तनशीलता से हिमालयी भू-भाग तथा उसके अनुप्रवाह(डाउनस्ट्रीम) वाले क्षेत्र सुदृढ़ तरीके से प्रभावित है। हिमालय क्षेत्र के लिए आगे आने वाले मौसम के दिनों में जल विज्ञान संबंधी पूर्वानुमानों से अपने दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों की योजना बनाने में बांध संचालकों, किसानों, उद्योगों तथा जल प्रबंधन बोर्डों जैसे हितधारकों को लाभान्वित कर सकते हैं, जबकि दीर्घकालिक अनुमानों से जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने में सहायता मिलती है। वे भी बाढ़ एवं सूखे से जुड़े जोखिमों के खिलाफ कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत की वर्तमान स्थिति अत्याधुनिक वैश्विक तथा क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान एवं जलवायु मॉडल की उपलब्धता,साथ ही हिमनद-जल विज्ञान संबंधी मॉडलों की वजह से विशिष्ट है। फिर भी, जल विज्ञान संबंधी पूर्वानुमानों को देने में एक प्रमुख चुनौती हिमनद-जल विज्ञान संबंधी मॉडलों के साथ मौसम पूर्वानुमान और जलवायु मॉडलों का एकीकरण है जो अभी भी एक अन्वेषण चरण में हैं तथा परिचालनीय रूप से उपलब्ध नहीं है। मौसम तथा जलवायु मॉडलों में एक बड़ी समस्या वर्षा पूर्वाग्रह है, जो बदले में हिमनद - जल विज्ञान संबंधी मॉडलों के प्रतिफल (आउटपुट) में पूर्वाग्रहों का संचालन करती है। इसके अलावा, सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं, घाटी(बेसिन) की प्रकृति एवं जल उपयोग पहलुओं को हिमनद-जल विज्ञान संबंधी मॉडलों में, आंशिक रूप से दुर्लभ अवलोकनों के कारण शामिल नहीं किया गया है। यह कार्यशाला अत्यधिक सम्बद्ध वैज्ञानिक प्रश्नों के साथ-साथ व्यावहारिक, संगठनात्मक तथा क्षमता वाले मुद्दों को संबोधित करते हुए, आगे के तरीकों को विकसित करेगी।

कार्यशाला का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र की घाटियों के लिए लघु, मध्यम, एवं दीर्घकालिक जल विज्ञान संबंधी पूर्वानुमानों के विकास को बढ़ावा देना, यह स्पष्ट रूप से बताते हुए की कैसे इस क्षेत्र के लिए एकीकृत मौसम-जल विज्ञान संबंधी पूर्वानुमान प्रणाली सुधारा जा सकता है। विशेष उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • प्रमुख वैज्ञानिक समस्याओं के समाधानों के लिए चर्चा करना जो एकीकृत प्रतिमानन में रुकावट डालती हैं, उदाहरण के लिए वर्षा पूर्वाग्रहों तथा उपयुक्त सांख्यिकीय प्रसंस्करण के पश्चात(पोस्ट-प्रोसेसिंग) / संशोधित विधियों का विकल्प, या मॉडल मूल्यांकन एवं परिभाषित प्रारंभिक स्थितियों के लिए अवलोकनों की उपलब्धता।
  • मौसम तथा हिमनद-जल विज्ञान संबंधी प्रतिमानन क्षमताओं तथा उसके अंतराल(गैप्स) एवं आगे के तरीकों का पहचान करके मौजूदा स्थिति का आकलन करना तथा अंतर-संस्थागत सहभागिता बढ़ाकर सहयोग को कैसे प्राप्त करें।
  • • मौसम एवं जल विज्ञान संबंधी समुदायों के बीच सहयोग बढ़ाना।

भाग लेने के लिए आवेदन करें।

आवेदन अब बंद कर दिया गया। सफल आवेदकों को जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा।

हिमनद वैज्ञानिकों; जल वैज्ञानिकों, मौसम वैज्ञानिकों तथा जलवायु वैज्ञानिक, जलवायु प्रतिमानकर्ताओं(मॉडेलर), सांख्यिकीविदों, हितधारकों एवं नीति निर्माताओं को कार्यशाला में रुचि रखने की संभावना है। पीएचडी छात्रों सहित, वैज्ञानिकों से सभी आजीविका(करियर) चरणों में आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। केंद्र कार्यशाला में भाग लेने वाले यूके और भारतीय प्रतिभागियों के लिए यथोचित यात्रा एवं जीविका खर्च प्रदान करेगी। आगे की और जानकारी के लिए संलग्न दस्तावेज़ कार्यशाला उपस्थिति के नियमों और शर्तों में मिल सकती है।

यूके से लगभग 10 और भारत से 20 प्रतिभागियों के लिए स्थान सीमित हैं। केंद्र कार्यशाला में प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी संस्थान से विशेषज्ञता तथा उपस्थित लोगों की संख्या का संतुलन सुनिश्चित करने के लिए देखेगा। केंद्र आवेदनों का आकलन करते समय निम्नलिखित पर विचार करेगा:

  • • कार्यशाला विषयवस्तु के लिए प्रासंगिक आवेदक विशेषज्ञता
  • कार्यशाला में भाग लेने के लिए प्रेरणा
  • कार्यशाला में अपेक्षित योगदान
  • भाग लेने से आवेदक को संभावित लाभ
  • संगठनात्मक संतुलन

कार्यशाला में उपस्थित लोगों को 20 मिनट की प्रस्तुति देने या एक पोस्टर पेश करने के प्रस्ताव के लिए आमंत्रित किया जाता है।

Activity Documents: 

गतिविधि का तिथि पंचांग: 

बुधवार, मई 2, 2018 to शुक्रवार, मई 4, 2018

Google map location: 

IUKWC_3rd_workshop_Dehradun