इंडो-यूके के संयुक्त कार्यक्रम का उद्देश्य दक्षिण भारत के राज्यों में जल वैज्ञानिकों एवं जल प्रबंधकों के बीच की खाई को खत्म करना।

भारत-यूके जल केंद्र (आईयूकेडब्ल्यूसी) के द्वारा 23 से 25 जनवरी 2018 के बीच कोच्चि में आयोजित एक तीन दिवसीय कार्यक्रम में छह दक्षिणी राज्यों के राज्य स्तर की जल नीति तथा प्रबंधन निकायों को भारत और ब्रिटेन के अग्रणी जल वैज्ञानिकों को एक साथ लाया गया। यह कार्यक्रम पहली बार केंद्र की योजनाबद्ध श्रृंखला में उपयोगकर्ता सहभागिता पहल के तहत किया गया था, जो कि नीति निर्माताओं, नियामकों और वाणिज्यिक कंपनियों के साथ वैज्ञानिकों को एक साथ लाने के लिए अभिकल्पित किया गया है ताकि संयुक्त भारत-यूके के जल सुरक्षा विज्ञान के उपयोगकर्ताओं के लिए संचार का समर्थन किया जा सके। यह आयोजन आईयूकेडब्ल्यूसी द्वारा प्लायमाउथ समुद्री प्रयोगशाला, ब्रिटेन और नानसेन पर्यावरण अनुसंधान केंद्र, कोच्चि के सहयोग से किया गया था।

भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान(आईआईटीएम) के केंद्र के सह-समन्वयकों में से एक डॉ ए के सहाय ने कहा "आईयूकेडब्ल्यूसी का उद्देश्य भारत-ब्रिटेन के जल शोध के परिणामों और उनके निर्देशित उपयोगकर्ता सहभागिता पहल के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के लिए संचार तथा स्थानांतरण का समर्थन करना है। हमें कोच्चि में इन कार्यक्रमों की पहली मेजबानी करने में खुशी हुई और भारत के अन्य भागों में भावी पहल के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में लाभ प्रदान करने के लिए श्रृंखला का विस्तार करने की उम्मीद है।

यह कार्यक्रम स्वभाव से बहु-क्षेत्रीय और बहु-हितधारक थी। जल नीति के विकास और केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में मीठे पानी के मुद्दों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें केरल के जैव विविधता बोर्ड, केरल जल संसाधन विभाग, कर्नाटक राज्य जैव विविधता बोर्ड, कर्नाटक जल संसाधन विभाग, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तमिलनाडु जल आपूर्ति बोर्ड, उड़ीसा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शामिल हैं।

ताज़ेपानी की निगरानी तंत्रों में सुधार एवं अनुसंधान तथा प्रबंधन के लिए आँकड़ा जैसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा केंद्रित किया गया। ब्रिटेन एवं भारतीय संस्थानों के वैज्ञानिकों ने पानी की आपूर्ति तथा प्रबंधन, पानी की गुणवत्ता, जैव विविधता और सिंचाई के क्षेत्र में संयुक्त भारत-यूके जल सुरक्षा अनुसंधान में अत्याधुनिक विकास की प्रस्तुत की। भारतीय सस्थानों में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की, राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान, कोच्चि,सीएमएफआरआई(केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान), कोच्चि, आईआईटी(भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), रुड़की, एट्रीईई, कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, आईआईएससी, बैंगलोर, राष्ट्रीय जल अकादमी शामिल हैं। ब्रिटेन के प्रतिभागियों में सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी, ब्रिटिश भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग और पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय शामिल थे।

सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाइड्रोलॉजी (सीईएच) के डॉ हैरी डिक्सन एवं आईयूकेडब्ल्यूसी के यूके के सह-समन्वयक ने कहा, " पिछले कुछ सालों में पानी के क्षेत्र में सहयोगी इंडो-यूके अनुसंधान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिसमें दोनों देशों में उन्नत जल विज्ञान का आयोजन किया गया है और संयुक्त जल शोध कार्यक्रमों में भारत और यूके की सरकारों द्वारा महत्वपूर्ण निवेश किया गया है। बढ़ती आबादी, तीव्र आर्थिक विकास तथा जलवायु परिवर्तन द्वारा प्रस्तुत महत्वपूर्ण चुनौतियों से निपटने के लिए उन संगठनों के साथ मिलकर वैज्ञानिकों को तैयार करना जो कि भारत में मीठे पानी के दिन-प्रतिदिन प्रबंधन का सामना कर रहे हैं। हम इस तरह के सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कोच्चि में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को देखते हैं।

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